📚 भूमि ज्ञान केंद्र — बिहार

ज़मीन के कागज़ात, आसान भाषा में

खतियान से लेकर लगान रसीद तक — बिहार में ज़मीन से जुड़ा हर दस्तावेज़ क्या है, क्यों ज़रूरी है और खरीदने से पहले उसमें क्या देखना है।

सीधे विषय पर जाएं:

🧾 लगान रसीद
📒 जमाबंदी पंजी
📜 खतियानअधिकार अभिलेख
खाता
112
खेसरा
845
रकबा
0.32 ए.

पहले पूरी तस्वीर समझें

ज़मीन के कागज़ आपस में कैसे जुड़े हैं?

हर कागज़ एक कड़ी है। सर्वे से खतियान बनता है, खतियान से जमाबंदी, और जमाबंदी पर लगान रसीद कटती है। जब ज़मीन बिकती या विरासत में मिलती है, तो दाखिल-खारिज से जमाबंदी में नया नाम चढ़ता है।

📐

चरण 1

सर्वे

अमीन ज़मीन मापकर नक्शा और खेसरा बनाते हैं।

📜

चरण 2

खतियान

सर्वे के बाद हक़ का स्थायी रिकॉर्ड।

📒

चरण 3

जमाबंदी पंजी

मौजूदा रैयत का चालू रजिस्टर।

🧾

चरण 4

लगान रसीद

जमाबंदी पर हर साल का लगान भुगतान।

🔄

बिक्री, बंटवारा या विरासत होने पर: डीड / वंशावली → दाखिल-खारिज (आम सूचना व खास सूचना के बाद) → जमाबंदी में नया नाम → नए नाम से लगान रसीद।

01मूल दस्तावेज़

खतियान

खतियान वह अधिकार अभिलेख (Record of Rights) है जो ज़मीन के सर्वे के बाद तैयार होता है। इसमें रैयत का नाम, उसका अधिकार, खाता संख्या, खेसरा (प्लॉट) संख्या, रकबा, ज़मीन की किस्म, लगान और कब्ज़े का विवरण दर्ज होता है।

ज़मीन के मूल मालिकाना हक़ का यह सबसे प्रमुख सबूत माना जाता है। किसी भी ज़मीन की जांच की शुरुआत खतियान से ही होती है।

💡 ध्यान दें: पुराने खतियान अक्सर कैथी लिपि में होते हैं। इन्हें पढ़ने के लिए भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय की कैथी लिपि पुस्तिका देखें।
खतियान
मौजा: रामपुर  •  थाना सं. 214
नमूना
खाता संख्या
112
खेसरा संख्या
845, 846
रकबा
0.32 एकड़
किस्म ज़मीन
धनहर
रैयत का नाम व अधिकार
काल्पनिक नाम — कायमी रैयत
चौहद्दी
उ. खेसरा 840द. रास्तापू. खेसरा 847प. नाला
लगान
₹ __ वार्षिक
CS

सीएस खतियान (कैडस्ट्रल)

ब्रिटिश काल के कैडस्ट्रल सर्वे (1905–1915) में बना पहला अधिकार अभिलेख — बंगाल काश्तकारी अधिनियम, 1885 के तहत तैयार।

✔ अधिकांश जिलों में आज भी यही आधार रिकॉर्ड है।

RS

आरएस खतियान (रिवीजनल)

1952 के बाद कई जिलों में हुए दूसरे सर्वे (री-सर्वे) में बना संशोधित खतियान।

⚠ यह सर्वे हर जिले में नहीं हुआ — अपने जिले की स्थिति जांचें।

खतियान से जुड़े ज़रूरी शब्द

🔢 खाता

सर्वे में दिया गया नंबर, जिसमें एक व्यक्ति की सारी ज़मीन दर्ज होती है — जैसे बैंक खाता संख्या।

📍 खेसरा

हर प्लॉट का क्रमांक, जो एक राजस्व गांव (मौजा) में अनोखा होता है।

🗺️ शजरा नक्शा

गांव / मौजा का विस्तृत नक्शा, जिसमें हर खेसरा की सीमा दिखती है।

📄 फर्द

खतियान या जमाबंदी की प्रमाणित प्रति — बैंक लोन, कोर्ट या रजिस्ट्री में काम आती है। अब बिहार भूमि पोर्टल पर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ भी मिलती है।

⬆ उत्तर — खेसरा 840
⬅ पश्चिम
नाला
खेसरा 845आपकी ज़मीन
पूरब ➡
खेसरा 847
⬇ दक्षिण — रास्ता

नमूना

खतियान का अहम हिस्सा

🧭 चौहद्दी — ज़मीन की चारों सीमाएं

खतियान में हर खेसरा की चौहद्दी दर्ज होती है — यानी उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम में ज़मीन किससे सटी है: पड़ोसी खेसरा / रैयत, रास्ता, नाला, नदी या कोई और पहचान। खाता-खेसरा कागज़ पर ज़मीन बताते हैं, चौहद्दी बताती है कि ज़मीन पर वह हिस्सा असल में कौन-सा है।

✔डीड में लिखी चौहद्दी को खतियान की चौहद्दी से मिलाएं।
✔मौके पर जाकर चारों तरफ़ की ज़मीन देखें — शजरा नक्शे के साथ।
✔शंका हो तो अमीन से नापी (पैमाइश) कराएं।
⚠ सर्वे के बाद से पड़ोसियों के नाम और रास्ते बदल गए हो सकते हैं। चौहद्दी में फ़र्क दिखे तो सौदे से पहले कारण ज़रूर पता करें — यही अक्सर सीमा विवाद की जड़ होता है।
02विरासत व बंटवारा

पारिवारिक घटनाक्रम

बिहार में ज़्यादातर ज़मीन पुश्तैनी है। खतियान में अक्सर दादा-परदादा का नाम होता है। इसलिए ज़मीन खरीदने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि परिवार में हक़ किसके पास और कितना है।

🌳 वंशावली

वंशावली परिवार का वृक्ष है — खतियानी रैयत से लेकर आज के सभी जीवित वारिसों तक। विरासत के आधार पर दाखिल-खारिज, बंटवारे और ज़मीन बेचने के समय यह सबसे ज़रूरी कागज़ होता है।

👴 दादा (खतियानी रैयत)
👨 पिता
👨 चाचा
👩 बुआ
🧑 आप👧 बहन

हरे घेरे वाली बेटियां भी कानूनी वारिस हैं

⚠ सबसे आम गलती: वंशावली में बेटियों या किसी वारिस का नाम छूट जाना। हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के बाद बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर हक़ है। किसी भी वारिस की सहमति के बिना हुई बिक्री आगे चलकर विवाद बन सकती है।

👪 अन्य पारिवारिक मामले

🏛️
विरासत

पुश्तैनी ज़मीन का वारिसों को हस्तांतरण।

📝
इंतकाल / वरसाल

रैयत की मृत्यु के बाद रिकॉर्ड में वारिसों का नाम चढ़ाना (उत्तराधिकार के आधार पर दाखिल-खारिज)।

✂️
बंटवारा

हिस्सेदारों के बीच ज़मीन का विभाजन। आपसी, कोर्ट द्वारा या रजिस्टर्ड बंटवारानामे से — कौन-सा खेसरा किसके हिस्से में आया, यह साफ़ लिखा होना चाहिए।

🎁
हिब्बा (दानपत्र)

बिना किसी मूल्य के, उपहार के रूप में ज़मीन का मालिकाना हक़ देना।

📜
वसीयत

मृत्यु के बाद संपत्ति किसे मिलेगी, इसका लिखित दस्तावेज़। वसीयत के आधार पर नाम चढ़ाने में भी दाखिल-खारिज ज़रूरी है।

🔁
बदलैन (ज़मीन की अदला-बदली)

दो रैयतों के बीच ज़मीन की अदला-बदली। विशेष सर्वेक्षण के दौरान आपसी सहमति से बदलैन के लिए 2025 में नियमावली में संशोधन हुआ है।

03हस्तांतरण

ख़रीद-बिक्री (डीड) और समझौता कागज़

ज़मीन का मालिकाना हक़ एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचाने वाले कागज़ों को डीड कहते हैं। हर डीड का काम अलग है — सही डीड पहचानना ही आधी सुरक्षा है।

🏷️

बैनामा / केवाला

रजिस्टर्ड विक्रय पत्र (Sale Deed), जिससे बिक्री द्वारा मालिकाना हक़ हस्तांतरित होता है।

🎁

हिब्बा / दानपत्र

बिना मूल्य लिए उपहार के रूप में ज़मीन देने का कागज़ (Gift Deed)।

📃

पट्टा / पट्टानामा

तय अवधि और शर्तों पर ज़मीन उपयोग के लिए देने का कागज़ (Lease Deed)। इससे मालिकाना हक़ नहीं मिलता।

🤝

एकरारनामा (बिक्री समझौता)

भविष्य में बेचने का वादा — कीमत, बयाना और समय-सीमा तय करता है। यह अपने-आप में मालिकाना हक़ नहीं देता।

✅ डीड पढ़ते समय ये ज़रूर मिलाएं

✔बेचने वाले का नाम चालू जमाबंदी में है या नहीं
✔खाता, खेसरा और रकबा — खतियान व जमाबंदी से मेल खाते हों
✔चौहद्दी (चारों सीमाएं) ज़मीन पर मौके से मेल खाती हों
✔पिछली सभी डीड की कड़ी — खतियानी रैयत से आज तक
✔पुश्तैनी ज़मीन हो तो सभी वारिसों की सहमति / हस्ताक्षर

🔄 रजिस्ट्री के बाद: दाखिल-खारिज

रजिस्ट्री से हक़ बदलता है, पर सरकारी रिकॉर्ड (जमाबंदी) में नया नाम दाखिल-खारिज से ही चढ़ता है।

① आवेदन — अंचल कार्यालय / ऑनलाइन
② आम सूचना (जनता से आपत्ति) व खास सूचना (संबंधित व्यक्ति को)
③ अंचलाधिकारी का आदेश
④ शुद्धिपत्र जारी, जमाबंदी में नया नाम
📒 जमाबंदी पंजी (पंजी-II)नमूना
जमाबंदी संख्या457
रैयतकाल्पनिक नाम
खाता / खेसरा112 / 845
रकबा0.32 एकड़
स्थिति✔ चालू
04चालू रिकॉर्ड

जमाबंदी पंजी

पंजी-II (रजिस्टर-II) एक राजस्व गांव के सभी रैयतों का सरकारी रजिस्टर है, जो सभी जमाबंदियों को मिलाकर बनता है। हर दाखिल-खारिज और सुधार इसी में दर्ज होता है।

जमाबंदी इसी पंजी का एक अंश है — इसमें रैयत का नाम-पता और ज़मीन का खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी व लगान दर्ज होता है। यह ऑनलाइन भी देखी जा सकती है।

🔗 बिहार भूमि पोर्टल पर जमाबंदी देखें

खतियान बनाम जमाबंदी — फ़र्क समझें

📜 खतियान

• सर्वे के समय बनता है

• उस समय के रैयत का नाम

• अगले सर्वे तक बदलता नहीं

• मूल हक़ का सबूत

📒 जमाबंदी

• दाखिल-खारिज से बनती / बदलती है

• आज के रैयत का नाम

• हर बिक्री / विरासत पर अपडेट

• मौजूदा कब्ज़े व लगान का रिकॉर्ड

05भुगतान का सबूत

लगान रसीद

लगान ज़मीन पर हर साल देय सरकारी कर है। उसके भुगतान पर मिलने वाली सरकारी रसीद को लगान रसीद कहते हैं।

पहले यह ऑफ़लाइन कटती थी, अब केवल ऑनलाइन जारी होती है।

रसीद में क्या देखें?

✔ रैयत का नाम ✔ जमाबंदी संख्या ✔ किस वर्ष तक भुगतान ✔ कोई बकाया तो नहीं
⚠ याद रखें: सिर्फ लगान रसीद से मालिकाना हक़ साबित नहीं होता। इसे हमेशा खतियान, जमाबंदी और डीड के साथ मिलाकर देखें।
🧾
ऑनलाइन लगान रसीद
नमूना
रैयतकाल्पनिक नाम
जमाबंदी सं.457
भुगतान वर्ष तक2025-26
बकाया₹ 0
✔ भुगतान सफल
06कानूनी ढांचा

कानून और अधिनियम

बिहार में ज़मीन से जुड़े ये प्रमुख कानून हैं। इनके मूल पाठ और सभी संशोधन भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

🏛️1885
आधार कानून

बंगाल काश्तकारी अधिनियम, 1885 (Bengal Tenancy Act)

उस समय बिहार बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा था। इसी अधिनियम के अध्याय X (अधिकार अभिलेख की तैयारी) के तहत बिहार में कैडस्ट्रल सर्वे हुआ और सीएस खतियान तैयार किए गए। रैयतों के अधिकार, लगान और खतियान की कानूनी मान्यता की जड़ यही कानून है।

बिहार अलग प्रांत बनने के बाद यही कानून बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 के नाम से लागू है। संशोधन: 2017; नियमावली संशोधन: 2018।

बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम2011

नामांतरण (म्यूटेशन) की पूरी प्रक्रिया तय करता है।

संशोधन: 2012, 2017

बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त अधिनियम2011

राज्य में चल रहे नए भूमि सर्वेक्षण और नए खतियान का आधार।

नियमावली 2012; संशोधन 2019, 2024, 2025

बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम2009

ज़मीन से जुड़े विवादों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था।

संशोधन: 2012, 2013, 2015

बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तन) अधिनियम2010

खेती की ज़मीन को घर, दुकान या उद्योग के उपयोग में बदलने के नियम।

संशोधन: 2012; नियमावली 2011

बिहार भूमि सुधार (अधिकतम सीमा निर्धारण तथा अधिशेष भूमि अर्जन) अधिनियमसीलिंग

एक व्यक्ति / परिवार कितनी ज़मीन रख सकता है, इसकी सीमा; अधिशेष ज़मीन सरकार लेती है।

संशोधन: 2009, 2016, 2019

बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियमसरकारी ज़मीन

सरकारी / सार्वजनिक ज़मीन पर अतिक्रमण हटाने की व्यवस्था।

संशोधन: 2012

बिहार विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्ति वासभूमि काश्तकारी अधिनियम1947

वासभूमि (रहने की ज़मीन) पर निर्दिष्ट व्यक्तियों के अधिकार।

The Bihar Privileged Persons Homestead Tenancy Act

📏 बोनस

ज़मीन की माप — एक नज़र में

1 एकड़
= 100 डिसमिल
= 43,560 वर्ग फुट
1 डिसमिल
≈ 435.6 वर्ग फुट
1 बीघा
≈ 20 कट्ठा
1 कट्ठा
= 20 धुर
(पटना क्षेत्र ≈ 1361 वर्ग फुट)
1 धुर
= 20 कला / धुरकी

⚠ कट्ठा और बीघा का माप अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है। सौदे में हमेशा डिसमिल या वर्ग फुट भी लिखवाएं।

📖 शब्दावली

कुछ और ज़रूरी शब्द

🏘️ मौजा

राजस्व गांव — खतियान, जमाबंदी और नक्शे की मूल इकाई।

🗂️ हल्का

सबसे छोटी राजस्व प्रशासनिक इकाई, अक्सर पंचायत के बराबर।

🏢 अंचल / अंचलाधिकारी

कई हल्कों का राजस्व क्षेत्र; अंचलाधिकारी (CO) दाखिल-खारिज, LPC व लगान के प्रमुख अधिकारी।

👷 हल्का कर्मचारी

ज़मीनी स्तर के राजस्व कर्मी — दाखिल-खारिज, लगान वसूली और रिकॉर्ड का काम।

📐 अमीन

ज़मीन की नापी, सीमांकन और सत्यापन करने वाले कर्मी।

📃 एलपीसी (LPC)

भूमि कब्ज़ा प्रमाण पत्र — अंचल स्तर से जारी, ज़मीन पर वास्तविक कब्ज़े की पुष्टि।

🌾 गैर-मजरुआ भूमि

ऐसी ज़मीन जो किसी रैयत के नाम दर्ज नहीं — 1950 के बाद सरकारी। ऐसी ज़मीन खरीदने से बचें।

🤲 भूदान भूमि

विनोबा भावे के आंदोलन में दान की गई ज़मीन, जो भूमिहीनों में बांटी गई।

🔍

कागज़ समझ में नहीं आ रहे? जांच हम करेंगे।

खतियान, जमाबंदी, डीड और वंशावली — सबकी जांच करके हम आपको सरल हिंदी में लिखित रिपोर्ट देंगे।

स्रोत: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार — राजस्व शब्दावली (13.10.2025); भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय। यह जानकारी केवल समझ के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी सौदे से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें।